व्याख्याता संवर्ग सेवा परीक्षा अध्ययन मार्गदर्शिका
परीक्षा योजना का अवलोकन
यह अध्ययन मार्गदर्शिका उत्तराखंड विशेष अधीनस्थ शिक्षा (व्याख्याता संवर्ग सेवा) (सामान्य और महिला शाखा) परीक्षा की तैयारी के लिए एक व्यापक संसाधन के रूप में डिज़ाइन की गई है। परीक्षा का उद्देश्य विभिन्न विषयों में व्याख्याता के रिक्त पदों पर सीधी भर्ती के माध्यम से चयन करना है। नीचे परीक्षा की संरचना और मुख्य विशेषताओं का विस्तृत अवलोकन दिया गया है।
परीक्षा संरचना:
विशेषता | विवरण |
परीक्षा का नाम
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| उत्तराखंड विशेष अधीनस्थ शिक्षा (व्याख्याता संवर्ग सेवा) (सामान्य और महिला शाखा) परीक्षा |
चयन प्रक्रिया | अंतिम चयन सूची केवल लिखित परीक्षा में उम्मीदवार के प्रदर्शन के आधार पर तैयार की जाएगी। |
परीक्षा का प्रकार | विषयवार लिखित परीक्षा, जिसमें प्रश्न वस्तुनिष्ठ और बहुविकल्पीय प्रकार के होंगे।
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प्रश्न पत्र | उम्मीदवार द्वारा चयनित प्रत्येक विषय के लिए दो प्रश्न पत्र (प्रश्न पत्र-I और प्रश्न पत्र-II) होंगे। |
प्रश्नों की संख्या | प्रत्येक प्रश्न पत्र में 150 प्रश्न होंगे। |
अधिकतम अंक
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| प्रत्येक प्रश्न पत्र के लिए 150 अंक निर्धारित हैं। |
समयावधि | प्रत्येक प्रश्न पत्र को पूरा करने के लिए 3 घंटे (180 मिनट) का समय दिया जाएगा। |
मूल्यांकन पद्धति | मूल्यांकन के लिए ऋणात्मक अंकन (Negative Marking) पद्धति का प्रयोग किया जाएगा।
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ऋणात्मक अंकन का नियम | - प्रत्येक गलत उत्तर के लिए, उस प्रश्न के लिए निर्धारित अंकों में से एक चौथाई (1/4) अंक काटा जाएगा। |
लिखित परीक्षा हेतु विषय सूची:
उम्मीदवार अपनी शैक्षिक अर्हता के अनुसार निम्नलिखित विषयों में से किसी एक का चयन कर सकते हैं:
- कृषि
- कला
- जीव-विज्ञान
- रसायन शास्त्र
- नागरिक शास्त्र
- वाणिज्य
- अर्थशास्त्र
- भूगोल
- हिंदी
- इतिहास
- गृह विज्ञान
- गणित
- भौतिक शास्त्र
- संस्कृत
- अंग्रेज़ी
- समाज शास्त्र
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लघु उत्तरीय प्रश्नोत्तरी
यह प्रश्नोत्तरी आपकी परीक्षा योजना की समझ का आकलन करने के लिए डिज़ाइन की गई है। प्रत्येक प्रश्न का उत्तर 2-3 वाक्यों में दें।
प्रश्न 1: इस परीक्षा का पूरा नाम क्या है और यह किन शाखाओं के लिए आयोजित की जाती है? प्रश्न 2: उम्मीदवारों का अंतिम चयन किस आधार पर किया जाएगा? प्रश्न 3: प्रत्येक चयनित विषय के लिए कितने प्रश्न पत्र आयोजित किए जाएँगे और प्रत्येक में कुल कितने प्रश्न होंगे? प्रश्न 4: परीक्षा में गलत उत्तरों के लिए ऋणात्मक अंकन का क्या प्रावधान है? प्रश्न 5: यदि कोई उम्मीदवार किसी एक प्रश्न के लिए एक से अधिक विकल्प चुनता है, तो उसका मूल्यांकन कैसे किया जाएगा? प्रश्न 6: प्रत्येक प्रश्न पत्र को हल करने के लिए कितनी समयावधि निर्धारित की गई है? प्रश्न 7: परीक्षा में प्रश्नों की प्रकृति कैसी होगी - वर्णनात्मक या वस्तुनिष्ठ? प्रश्न 8: 'नागरिक शास्त्र' विषय के द्वितीय प्रश्न पत्र के पाठ्यक्रम में उल्लिखित किन्हीं तीन मुख्य खंडों के नाम बताइए। प्रश्न 9: 'कृषि' विषय के प्रथम प्रश्न पत्र के पाठ्यक्रम में शामिल किन्हीं तीन प्रमुख शीर्षकों का उल्लेख करें। प्रश्न 10: 'इतिहास' विषय के प्रथम प्रश्न पत्र के पाठ्यक्रम में प्राचीन भारत के अंतर्गत किन दो साम्राज्यों के विस्तृत अध्ययन का उल्लेख है?
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उत्तर कुंजी
उत्तर 1: परीक्षा का पूरा नाम "उत्तराखंड विशेष अधीनस्थ शिक्षा (व्याख्याता संवर्ग सेवा) परीक्षा" है। यह परीक्षा सामान्य और महिला दोनों शाखाओं के लिए आयोजित की जाती है।
उत्तर 2: उम्मीदवारों का अंतिम चयन पूरी तरह से लिखित परीक्षा में उनके प्रदर्शन के आधार पर तैयार की गई मेरिट सूची के अनुसार किया जाएगा। इस चयन प्रक्रिया में साक्षात्कार या कोई अन्य चरण शामिल नहीं है।
उत्तर 3: प्रत्येक चयनित विषय के लिए दो प्रश्न पत्र (प्रश्न पत्र-I और प्रश्न पत्र-II) आयोजित किए जाएँगे। प्रत्येक प्रश्न पत्र में 150 वस्तुनिष्ठ प्रकार के प्रश्न होंगे।
उत्तर 4: परीक्षा में ऋणात्मक अंकन का प्रावधान है, जिसके तहत प्रत्येक गलत उत्तर के लिए उस प्रश्न हेतु निर्धारित अंकों का एक चौथाई (1/4) अंक काट लिया जाएगा। यह नियम उम्मीदवारों को अनुमान लगाने से हतोत्साहित करने के लिए है।
उत्तर 5: यदि कोई उम्मीदवार किसी एक प्रश्न के लिए एक से अधिक उत्तर देता है, तो इसे एक गलत उत्तर माना जाएगा। इस स्थिति में भी, उम्मीदवार के कुल प्राप्तांक से उस प्रश्न के लिए निर्धारित अंकों का 1/4 हिस्सा काट लिया जाएगा।
उत्तर 6: प्रत्येक प्रश्न पत्र, चाहे वह प्रश्न पत्र-I हो या प्रश्न पत्र-II, को हल करने के लिए 03 घंटे की समयावधि निर्धारित की गई है। उम्मीदवारों को इस समय के भीतर 150 प्रश्नों का उत्तर देना होगा।
उत्तर 7: परीक्षा में सभी प्रश्न वस्तुनिष्ठ और बहुविकल्पीय प्रकार के होंगे। उम्मीदवारों को प्रत्येक प्रश्न के लिए दिए गए विकल्पों में से सही उत्तर का चयन करना होगा।
उत्तर 8: 'नागरिक शास्त्र' विषय के द्वितीय प्रश्न पत्र के पाठ्यक्रम में तीन मुख्य खंड हैं: (अ) तुलनात्मक राजनीति एवं राजनीतिक विश्लेषण, (ब) लोक प्रशासन, और (स) अंतर्राष्ट्रीय संबंध।
उत्तर 9: 'कृषि' विषय के प्रथम प्रश्न पत्र के पाठ्यक्रम में सस्य विज्ञान और कृषि मौसम विज्ञान, मृदा विज्ञान और कृषि रसायन, और पादप कार्यिकी विज्ञान जैसे प्रमुख शीर्षक शामिल हैं।
उत्तर 10: 'इतिहास' विषय के प्रथम प्रश्न पत्र में प्राचीन भारत के अंतर्गत मौर्य साम्राज्य और गुप्त साम्राज्य के विस्तृत अध्ययन का उल्लेख है, जिसमें उनकी स्थापना, प्रशासन, समाज, कला और पतन शामिल हैं।
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निबंधात्मक प्रश्न हेतु सुझाव
निम्नलिखित प्रश्न आपको पाठ्यक्रम और परीक्षा पैटर्न की गहरी समझ विकसित करने में मदद करेंगे। (इनके उत्तर प्रदान नहीं किए गए हैं)।
- व्याख्याता चयन प्रक्रिया में केवल लिखित परीक्षा को आधार बनाने के फायदे और नुकसान का आलोचनात्मक विश्लेषण करें।
- किसी भी एक विषय (जैसे, भूगोल या रसायन शास्त्र) के पाठ्यक्रम का अवलोकन करें और विश्लेषण करें कि प्रश्न पत्र-I और प्रश्न पत्र-II के बीच विषयों का विभाजन किस प्रकार उम्मीदवार के मौलिक और विशिष्ट ज्ञान दोनों का परीक्षण करता है।
- "ऋणात्मक अंकन पद्धति न केवल ज्ञान का बल्कि उम्मीदवारों के निर्णय लेने और जोखिम प्रबंधन कौशल का भी परीक्षण करती है।" इस कथन के आलोक में अपनी परीक्षा रणनीति पर चर्चा करें।
- पाठ्यक्रम में 'भारतीय समकालीन कलाकार' और 'समकालीन राजनीतिक विचार' जैसे आधुनिक विषयों को शामिल करने के महत्व पर प्रकाश डालें।
- विभिन्न विषयों (जैसे गृह विज्ञान, नागरिक शास्त्र, भूगोल) के पाठ्यक्रम में उत्तराखंड राज्य के विशेष संदर्भों को शामिल करने के औचित्य और इसके शैक्षिक महत्व का मूल्यांकन करें।
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प्रमुख शब्दावली
- वस्तुनिष्ठ प्रकार (Objective Type): ऐसे प्रश्न जिनमें उम्मीदवार को दिए गए कई विकल्पों में से एक सही उत्तर का चयन करना होता है। यह ज्ञान की सटीकता और स्मरण शक्ति का परीक्षण करता है।
- ऋणात्मक अंकन (Negative Marking): एक मूल्यांकन पद्धति जिसमें प्रत्येक गलत उत्तर के लिए उम्मीदवार के कुल अंकों में से एक निश्चित अंक (इस परीक्षा में 1/4) काट लिए जाते हैं।
- बहुविकल्पीय प्रश्न (Multiple Choice Question): एक वस्तुनिष्ठ प्रश्न प्रारूप जिसमें एक प्रश्न के साथ कई संभावित उत्तर (विकल्प) दिए जाते हैं, जिनमें से केवल एक सही होता है।
- सस्य विज्ञान (Agronomy): कृषि विज्ञान की वह शाखा जो फसल उत्पादन के सिद्धांतों और प्रथाओं के साथ-साथ मृदा प्रबंधन का अध्ययन करती है। इसमें बीज, जुताई, सिंचाई और फसल चक्र जैसे विषय शामिल हैं।
- आनुवंशिकी और पादप प्रजनन (Genetics and Plant Breeding): वह वैज्ञानिक क्षेत्र जो फसल सुधार के लिए आनुवंशिकी के सिद्धांतों का उपयोग करता है। इसमें संकरण, चयन और उत्परिवर्तन जैसी तकनीकों का अध्ययन किया जाता है।
- लोक प्रशासन (Public Administration): अध्ययन का वह क्षेत्र जो सरकारी नीतियों के कार्यान्वयन और सरकारी मशीनरी के प्रबंधन से संबंधित है। इसमें संगठन के सिद्धांत, वित्तीय प्रशासन और सुशासन शामिल हैं।
- समष्टि अर्थशास्त्र (Macroeconomics): अर्थशास्त्र की वह शाखा जो संपूर्ण अर्थव्यवस्था के व्यवहार और प्रदर्शन का अध्ययन करती है। इसमें राष्ट्रीय आय, मुद्रास्फीति, बेरोजगारी और सरकारी बजट जैसे व्यापक मुद्दों का विश्लेषण किया जाता है।
- व्यष्टि अर्थशास्त्र (Microeconomics): अर्थशास्त्र की वह शाखा जो व्यक्तिगत आर्थिक एजेंटों, जैसे कि घरों और फर्मों के व्यवहार और उनके निर्णयों का अध्ययन करती है।
- भू-आकृति विज्ञान (Geomorphology): भौतिक भूगोल की शाखा जो पृथ्वी की भू-आकृतियों, उनकी प्रक्रियाओं, रूपों और अवसादों का अध्ययन करती है।
- भारतीय काव्य शास्त्र (Indian Poetics): भारतीय साहित्य परंपरा में काव्य के सिद्धांतों का अध्ययन। इसमें रस, अलंकार, रीति, ध्वनि जैसे काव्य-सम्प्रदायों का विवेचन किया जाता है।
- सल्तनत काल (Sultanate Period): मध्यकालीन भारतीय इतिहास का वह काल (लगभग 1206 से 1526 ईस्वी) जब दिल्ली पर तुर्की और अफगान राजवंशों का शासन था, जिसमें खिलजी, तुगलक और लोदी वंश शामिल थे।
- जैव प्रौद्योगिकी (Biotechnology): प्रौद्योगिकी जो जैविक प्रणालियों, जीवित जीवों या उनके डेरिवेटिव का उपयोग करके विशिष्ट उपयोग के लिए उत्पादों या प्रक्रियाओं को बनाने या संशोधित करने के लिए करती है। इसमें जीन क्लोनिंग और ऊतक संवर्धन शामिल हैं।
- स्पेक्ट्रोस्कोपी (Spectroscopy): भौतिकी और रसायन शास्त्र में उपयोग की जाने वाली एक तकनीक, जो पदार्थ और विद्युत चुम्बकीय विकिरण के बीच की अंतःक्रिया का अध्ययन करती है ताकि पदार्थ की संरचना और गुणों का पता लगाया जा सके।
- त्रिभुज (Shadanga): भारतीय चित्रकला के छह अंग या सिद्धांत, जिनका उल्लेख प्राचीन ग्रंथों में मिलता है और जो एक कलाकृति को पूर्ण बनाते हैं।




